
वसीम खान मऊ रिपोर्टर
मऊ:लखनऊ में राष्ट्र रक्षक चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव राजभर जी पर की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। इस मामले में स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के लिए सुभासपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की।
ज्ञापन में यह आरोप लगाया गया कि शौकत अली ने अपनी टिप्पणी के माध्यम से न केवल सम्राट सुहेलदेव के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, बल्कि राष्ट्र की एकता और अखंडता को भी आहत करने का कार्य किया। सुभासपा के प्रदेश संगठन मंत्री मनोज अर्कवंशी, प्रदेश पदाधिकारी रितेश मॉल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश पदाधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
ज्ञापन में क्या कहा गया:
ज्ञापन में नेताओं ने प्रशासन से यह अनुरोध किया कि शौकत अली के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज किया जाए, ताकि इस प्रकार की विभाजनकारी बयानबाजी को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान न केवल राष्ट्रीय एकता को कमजोर करते हैं, बल्कि समाज में नफरत और हिंसा की भावना को बढ़ावा देते हैं।
मनोज अर्कवंशी ने कहा, “शौकत अली का बयान न केवल राष्ट्र भावना को ठेस पहुँचाता है, बल्कि यह पूरे देश की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करने की एक सोची-समझी कोशिश है। इस प्रकार की बयानबाजी से समाज में असहमति और विघटन की स्थिति उत्पन्न होती है, जो किसी भी सभ्य और लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद खतरनाक है।”
राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा जरूरी:
समाज के विभिन्न वर्गों के बीच द्वेष और हिंसा को बढ़ावा देने वाले बयानों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग भी उठाई गई। नेताओं ने यह भी कहा कि यह समय की आवश्यकता है कि प्रशासन इस तरह की नफरत फैलाने वाली भाषा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे और राष्ट्र की एकता और अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए कानून का पालन कड़ा से कड़ा किया जाए।
नफरत फैलाने वाली टिप्पणियों पर गंभीर सवाल:
शौकत अली द्वारा किए गए विवादित बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। उनके बयान को लेकर कई समाजसेवी और राजनीतिक संगठन सख्त प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। समाज में पहले से मौजूद विभिन्न तनावों को और बढ़ावा देने वाली ऐसी टिप्पणियां न केवल देश की शांति को प्रभावित कर सकती हैं, बल्कि इसे एक नया राजनीतिक विवाद भी बना सकती हैं।
इस बीच, यह देखा जा रहा है कि इस घटना ने विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच एक बार फिर राष्ट्र की एकता और सामाजिक समरसता पर जोर देने की आवश्यकता को उजागर किया है।
सभी नेताओं ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लेकर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दायर किया जाए, ताकि इस प्रकार के विभाजनकारी और नफरत फैलाने वाले बयानों को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान केवल हमारे राष्ट्र के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के हर नागरिक के लिए खतरनाक हो सकते हैं।




