
वसीम खान मऊ रिपोर्टर
मधुबन, मऊ। घाघरा नदी के उफनती लहरों से हो रही कटान की रफ्तार अब बिंदटोलिया की नई बस्ती के रिहायशी मकानों को अपने जद में लेने को आतुर दिख रही है। घाघरा नदी के कटान की गति तेज होने से लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई है। घाघरा की लहरों के उफान से बिंदटोलिया गांव की नई बस्ती के रिहायशी इलाके में कटान का सिलसिला जारी है। घाघरा के प्रकोप से घनश्याम निषाद, राधेश्याम निषाद, नंदू निषाद, रामदुलारे निषाद, रामछबिला, रामचंद्र निषाद, शंकर दयाल निषाद, रामू समेत 13 परिवारों की रिहायशी मकान घाघरा के गोंद में समा रही है। इन परिवारों के लोगों को प्रशासन ने दुबारी इंटर कालेज में ठहराया है। कटान पीड़ितों की मदद के लिए भाजपा के युवा नेता भरत भैया ने जिला प्रशासन से बंधे इस पार आवासीय आवंटन एवं मकान का मुआवजा मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए तत्काल मुहैया कराने की मांग की है। कटान की जद में आ रही मकानों के ईंट व सरिया को बचाने की कवायद में जुटे पीड़ित परिवार के लोग मकानों को तोड़कर सामानों को सुरक्षित जगहों पर भेज रहे हैं। नदी की कटान बिंदटोलिया गांव की नई बस्ती की आबादी को अपने आगोश में लेने को आतुर दिख रही है। नदी की तबाही को लेकर कटान पीड़ितों को अब बचाव का कोई अन्य विकल्प नहीं दिख रहा है। वहीं कटान पीड़ितों ने बनी-बनाई मकान को घाघरा के मुहाने पर आने से ईंट को नदी में समाने से बचाने के लिए अपने हाथों से उजाड़ने के लिए विवश हैं। कटान की विभीषिका झेल रहे बिंदटोलिया के लोगों के ऊपर घाघरा नदी ने कटान के रूप में आफत लेकर आई है। अपनी आंखों से नदी की धारा में कटकर समाती जमीन व घर को देख लोगों की पीड़ा बढ़ गई है। लेकिन प्रकृति के आगे उनको घर बचाने का एक भी उपाय काम नहीं आ रही है। कटान का मंजर देख लोग खूंन के आंसू रोने को विवश हैं। नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद अब लोग बाढ़ से नहीं बल्कि कटान की मार से नहीं उबर पा रहे हैं। कटान से बिंदटोलिया की नई बस्ती के लोगों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। घाघरा की उफनती लहरें कटान के रूप में सबसे अधिक तबाही बिंदटोलिया की नई बस्ती में मचा रही है। नदी कटान की जद में आने से नई बस्ती का आस्तित्व पर अब खतरा मंडराने लगा है। घाघरा के जलस्तर में घटाव का क्रम शुरू होने के साथ कटान में तेजी आने से को लेकर लोगों की मुश्किलें रूकने का नाम नहीं ले रही है।




