
ब्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट, लखनऊ ने एक अहम फैसले में साधना सिंह द्वारा मायावती के प्रति की गई टिप्पणी और अयोध्या के महंत राजू दास व अरुण यादव द्वारा मुलायम सिंह यादव के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के संबंध में एफआईआर दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया है। यह याचिका आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर की गई थी।

अमिताभ ठाकुर ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि इन मामलों में गंभीर और अपमानजनक भाषा का प्रयोग हुआ, लेकिन अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध रोज एफआईआर दर्ज हो रही हैं, जबकि विपक्षी नेताओं के मामले में निष्क्रियता दिखाई जा रही है, जो समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
हालांकि, पुलिस ने जवाब में कहा कि याचिकाकर्ता ने केवल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर एफआईआर की मांग की, जबकि कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मानहानि के मामलों में शिकायत दर्ज कराने का अधिकार केवल संबंधित “व्यथित व्यक्ति” को होता है और अमिताभ ठाकुर इस परिभाषा में नहीं आते।
अंततः कोर्ट ने पाया कि आरोपों की सच्चाई की जांच के बिना एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं है और राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के अभाव में कार्यवाही नहीं की जा सकती। परिणामस्वरूप, याचिका खारिज कर दी गई।




