
व्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
चंदौली जनपद के गोधना से लेवा मोड़ तक बन रही सड़क के चौड़ीकरण कार्य ने अब विवाद का रूप ले लिया है। नियामताबाद ब्लॉक,बुधवार पांडेयपुर के पास गढ़ई नदी पर पीडब्ल्यूडी विभाग और ठेकेदार द्वारा मिट्टी पाटकर करीब 1.5 किलोमीटर क्षेत्र में मिट्टी डालकर नदी भूमि पर कब्जा कर सड़क चौड़ीकरण कर रहे हैं यह कार्य सिंचाई विभाग की आपत्ति और मना करने के बावजूद किया गया, जिससे अब इसके गंभीर परिणाम सामने आने लगे हैं।

लगातार हो रही भारी बारिश के कारण गढ़ई नदी में पहले से ही जलस्तर काफी बढ़ गया था। लेकिन नदी के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र में मिट्टी डालकर किए गए अतिक्रमण के कारण अब पानी का बहाव बाधित हो गया है। नतीजा यह हुआ कि आसपास के खेतों में नदी का पानी भर गया और सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और गुस्सा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने पहले ही पीडब्ल्यूडी विभाग को चेतावनी दी थी कि नदी के बहाव क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न किया जाए। लेकिन विभाग द्वारा इसे नजरअंदाज करते हुए मिट्टी डालकर सड़क चौड़ीकरण का कार्य जारी रखा गया। जब इस पर सवाल उठाए गए तो पीडब्ल्यूडी विभाग ने जवाब दिया कि जितना हिस्सा नदी की भूमि पर कब्जा हुआ है, उसके बगल में नदी का चौड़ीकरण किया जाएगा।
हालांकि सिंचाई विभाग इस तर्क से संतुष्ट नहीं है। उनका कहना है कि नदी का प्रवाह एक संतुलित प्रणाली के तहत होता है और उसमें किसी भी तरह का हस्तक्षेप बाढ़ जैसी स्थिति को जन्म दे सकता है, जिसका असर अब दिख भी रहा है। किसानों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला न सिर्फ अवैध कब्जे का है, बल्कि विभागीय तालमेल की कमी और लापरवाही का भी बड़ा उदाहरण बन गया है। अगर समय रहते समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।




