
व्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
मुगलसराय तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांव इस बार बाढ़ की चपेट में आ गए, जिससे किसानों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। खेतों में खड़ी धान, फसलें पानी में डूब गईं, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात को देखते हुए चंदौली के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने स्वयं प्रभावित गांवों का दौरा किया था और बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी किसान को सहायता से वंचित न रखा जाए

जिलाधिकारी के निर्देश पर मुगलसराय तहसीलदार, एसडीएम और राजस्व विभाग की टीम ने राहत कार्यों में सक्रियता दिखाई। बाढ़ राहत कैंपों में लोगों को आवश्यक सामान उपलब्ध कराया गया और प्रशासन ने यह भरोसा दिलाया कि नुकसान का पूरा आकलन कर किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। लेकिन जब खेतों की खतौनी (भूमि अभिलेख) की आवश्यकता पड़ी, तब किसानों को नई परेशानी का सामना करना पड़ा।
हसनपुर गांव के लेखपाल राजीव कुमार ने किसानों को फोन पर बताया कि वे गांव नहीं आएंगे, बल्कि किसान स्वयं तहसील कार्यालय पहुंचकर खतौनी हमारे पास जमा करें। बाढ़ से पहले ही परेशान किसान अब तहसील का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। कई किसानों ने बताया , रास्ते खराब हैं, फिर भी उनसे तहसील बुलाया जा रहा है। ग्रामीणों ने पहले भी इस लेखपाल की शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इस मामले में एसडीएम अनुपम मिश्रा ने कहा कि किसी भी किसान को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजस्व कर्मी स्वयं गांव जाकर किसानों की खतौनियां एकत्र करें और रिपोर्ट तैयार करें। एसडीएम ने चेतावनी दी कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी आदेशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। बाढ़ प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत दिलाने के लिए प्रशासन ने सभी स्तरों पर निगरानी तेज कर दी है।




