
ब्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद की मुगलसराय विधानसभा के अंतर्गत आने वाला अमोघपुर गांव इन दिनों जलभराव की विकट समस्या से जूझ रहा है। विडंबना यह है कि यहां के विधायक रमेश जायसवाल अक्सर अपने भाषणों में कहते हैं कि “विकास की गंगा बह रही है”, लेकिन अब ग्रामीण तंज कसते हुए कह रहे हैं कि विकास की गंगा तो नहीं, सड़क पर गंगा जरूर बह रही है, नाव चलाना बाकी है।
लगातार जलभराव से ग्रामीण बेहाल

गांव के मुख्य मार्ग पर पिछले एक सप्ताह से पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों में पानी घुसने की स्थिति बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश थोड़ी सी भी हो जाए तो पानी भर जाता है, लेकिन इस बार हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए हैं।
करोड़ों की योजना बनी परेशानी की जड़
यह समस्या उस समय उत्पन्न हुई जब पड़ाव से नेशनल हाईवे NH-2 को जोड़ने वाली सड़क का चौड़ीकरण शुरू किया गया यह सड़क लंबे समय से निर्माणाधीन है और करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कराया गया था।
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि PWD द्वारा सड़क चौड़ीकरण के दौरान ठेकेदार ने बिना किसी योजना के सीवर पाइप लाइन को तोड़ दिया, जिससे बारिश का पानी अब नाली से निकलने की बजाय सड़क पर ही जमा हो रहा है।

ग्राम प्रधान बोले – ठेकेदार की लापरवाही

अमोघपुर ग्राम प्रधान सुनील चौहान ने बताया कि भाजपा पूर्व सांसद डाक्टर महेंद्र नाथ पांडेय सांसद निधि से लगभग एक करोड़ 25 लाख की लागत से बनाई गई सीवर पाइप लाइन पहले बरसात के पानी को आराम से बाहर निकाल देती थी, लेकिन अब उसे PWD ठेकेदार द्वारा तोड़ दिए जाने के कारण गांव जलमग्न हो गया है। उन्होंने ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना विभागीय समन्वय और तकनीकी सलाह के पाइप लाइन को तोड़ा गया, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
प्रशासनिक लापरवाही या विभागीय तालमेल की कमी?
यह मामला यह भी उजागर करता है कि कैसे विभागीय समन्वय की कमी और जिम्मेदारों की अनदेखी के कारण करोड़ों की योजनाएं न केवल विफल हो जाती हैं बल्कि जनता के लिए अभिशाप बन जाती हैं। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
क्या कहता है विभाग
जब इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि बरसात के बाद पुनः सीवर पाइप लाइन का निर्माण किया जाएगा, जिससे पानी निकासी की समस्या का स्थायी समाधान होगा। हालांकि, ग्रामीण इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब पहले से बना हुआ समाधान तोड़ दिया गया, तो उसे पहले ठीक क्यों नहीं किया गया?
मुगलसराय विधानसभा का यह अमोघपुर गांव आज विकास की सच्चाई का आईना बन चुका है। जहां एक तरफ भाषणों में विकास की गंगा बहाने की बात की जाती है, वहीं जमीनी सच्चाई यह है कि लोग सड़कों पर नाव चलाने की बात करने को मजबूर हैं। अब समय आ गया है कि विभागीय लापरवाही पर रोक लगाकर जिम्मेदारों को जवाबदेह बनाया जाए और ग्रामीणों को जलभराव जैसी समस्याओं से स्थायी राहत दिलाई जाए। वरना ‘विकास की गंगा’ बस नारों तक ही सिमट कर रह जाएगी।

भाजपा विधायक रमेश जायसवाल ने बताया कि जल्द समस्या का निस्तारण किया जाएगा




