
व्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
चंदौली जनपद के नियामताबाद ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा पचोखर तकीया में इन दिनों बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। चंद्रप्रभा सहित अन्य नदियों के रौद्र रूप ने ग्रामीण जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में हो रही लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे गांवों में पानी घुस चुका है और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है।
इसी बीच जब यह सूचना फैली कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक रमेश जायसवाल स्वयं तकिया गांव में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने आ रहे हैं, तो ग्रामीणों के मन में एक उम्मीद की किरण जगी। उन्हें लगा कि शायद अब उनकी समस्याओं को सुनने और समझने वाला कोई आ रहा है। गांव की एक अधेड़ महिला, जो लंबे समय से अपनी परेशानियों से जूझ रही थी, अपने झोपड़े से निकलकर विधायक जी से मिलने की आस में घंटों तक उनका इंतजार करती रही।

लेकिन गांव तक पहुंचने से पहले ही चदाईत हसनपुर मार्ग पर बाढ़ के पानी ने सड़क को काट दिया, जिससे रास्ता अवरुद्ध हो गया। विधायक जी का काफिला वहीं रुक गया और वह अपनी गाड़ी से नीचे उतरे बिना ही वापस लौट गए। यह दृश्य देखकर ग्रामीणों के चेहरे पर छाई उम्मीद की रेखाएं मायूसी में बदल गईं। महिला जो अपनी तकलीफें बयान करने के लिए तैयार थी, वहीं खड़ी की खड़ी रह गई।

विधायक के इस रवैये की चर्चा तेजी से पूरे क्षेत्र में फैलने लगी है। लोगों का कहना है कि जब वोट मांगने का समय होता है, तो नेता गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचते हैं, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो। लेकिन आज जब लोग वास्तविक संकट से गुजर रहे हैं, तो विधायक जी गाड़ी से उतरने तक को तैयार नहीं हुए। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर रास्ता खराब था, तो विधायक जी पैदल या मोटरसाइकिल से भी गांव में पहुंच सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

इस घटना के बाद लोगों को पूर्व भाजपा विधायक छब्बू पटेल की याद आ गई। जब वे विधायक थे और इसी तरह की बाढ़ आई थी, तब उन्होंने करीब दो किलोमीटर तक पैदल जलमग्न क्षेत्र में घूमकर निरीक्षण किया था। उस दौरान वे सांप के काटने का शिकार भी हुए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने लोगों के बीच पहुंचकर राहत सामग्री बांटी थी और पीड़ितों का दुख बांटने की कोशिश की थी।
आज की राजनीति में जहां जनप्रतिनिधियों को जनता का सेवक माना जाता है, वहां ऐसे व्यवहार और संवेदनहीनता ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्तमान विधायक वास्तव में जनता के दुख-दर्द को समझते, तो किसी भी साधन से गांव तक पहुंचने की कोशिश करते।
आज पचोखर तकीया गांव न केवल बाढ़ से जूझ रहा है, बल्कि नेताओं की उपेक्षा से भी पीड़ित है। महिला की आंखें आज भी इंतजार कर रही हैं – उस नेता के लिए जो उसकी तकलीफ सुने, जो उसके घर की हालत देखे और जो उसे उसका हक दिला सके। लेकिन दुर्भाग्यवश, आज वह इंतजार अधूरा रह गया।

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि राजनीति और जनता के बीच दूरी अब सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि संवेदनाओं की कमी के कारण भी बढ़ रही है। अब देखना यह है कि क्या विधायक जी इस आलोचना से सबक लेंगे और दोबारा जनता के बीच जाकर अपने कर्तव्यों को निभाएंगे या यह इंतजार यूं ही चलता रहेगा।
भाजपा विधायक रमेश जायसवाल ने बताया कि रास्ता कट जाने की वजह से हम पहुंच नहीं पा रहे हैं जल्द ही लोगों से मिलेंगे




