
व्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
चंदौली, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई जल जीवन मिशन योजना का क्रियान्वयन चंदौली जनपद में अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2019 को इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की गई थी, जिसमें हर घर तक नल के माध्यम से स्वच्छ जल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मिशन को विशेष प्राथमिकता देते हुए इसे तेजी से लागू करने के निर्देश दिए थे।
हालांकि चंदौली जिले में इस योजना की प्रगति निराशाजनक है। जिले की कुल 704 ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के तहत 474 पानी टंकियों का निर्माण प्रस्तावित है, सिर्फ 117 योजनाएं ही पूरी तरह से चालू हो पाई हैं। इस स्थिति ने ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
ग्रामीणों को अभी भी इंतजार

गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि गर्मियों के मौसम में पानी की भारी किल्लत होती है। जल जीवन मिशन से उन्हें उम्मीद थी कि अब उन्हें साफ और पर्याप्त पानी मिलेगा, लेकिन काम की धीमी गति और अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब तक वे टैंकर और हैंडपंप पर निर्भर हैं।
अधूरी पाइपलाइन और टूटी सड़कें

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिन सड़कों को खोदकर पाइपलाइन बिछाई गई थी, उनकी मरम्मत अब तक नहीं की गई है। इससे लोगों को आवागमन में कठिनाई हो रही है। कहीं-कहीं तो सड़कें महीनों से खुदी पड़ी हैं और वर्षा के कारण गड्ढों में कीचड़ भर चुका है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
ठेकेदारों की मनमानी और विभागीय लापरवाही
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस देरी के पीछे विभागीय लापरवाही और ठेकेदारों की मनमानी जिम्मेदार है। कई स्थानों पर पाइपलाइन ठीक से नहीं बिछाई गई या अधूरी छोड़ दी गई। निगरानी का अभाव है और न ही समय पर गुणवत्ता की जांच की जा रही है। कार्यों में पारदर्शिता की कमी भी ग्रामीणों को खटक रही है।
योजना का उद्देश्य और जमीनी हकीकत
जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर ग्रामीण घर को 2024 तक नल से जल उपलब्ध कराना है। बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में यह योजना वरदान साबित हुई है, लेकिन चंदौली में जमीनी हालात कुछ और ही बयां करते हैं। कागजों में योजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हजारों परिवार अब भी शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
क्या कहता है प्रशासन?
हालांकि जल निगम और संबंधित विभागों का कहना है कि योजनाओं को जल्द पूरा किया जाएगा और कार्यों में तेजी लाई जा रही है। लेकिन अब यह केवल दावे बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है और वे बार-बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद सुनवाई न होने पर निराश हैं।
निष्कर्ष
जल जीवन मिशन की मंशा भले ही जनकल्याणकारी हो, लेकिन इसके क्रियान्वयन में जिस प्रकार की सुस्ती और लापरवाही सामने आ रही है, वह चिंता का विषय है। सरकार को चाहिए कि वह इस योजना की समीक्षा करे, कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित कराए और समयबद्ध रूप से कार्य पूरा करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई करे। वरना ग्रामीणों को शुद्ध जल उपलब्ध कराने का यह सपना अधूरा ही रह जाएगा।




