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Chandauli news,देउरा में झोलाछाप डॉक्टर की घोर लापरवाही 17 वर्षीय अर्चना की ज़िंदगी दांव पर,

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नौगढ़ में फर्जी चिकित्सकों का आतंक बढ़ा

संवाददाता
विनोद कुमार यादव

नौगढ़ चन्दौली
देउरा गांव में हुए गंभीर हादसे ने इलाके में मौज़ूद स्वास्थ्य व्यवस्था की कमज़ोरी और झोलाछाप डॉक्टरों की बेशर्मी को उजागर कर दिया है। तेन्दुआ निवासी 17 वर्षीय अर्चना पुत्री रामजी क्लिनिक में लगाए गए एक इंजेक्शन के तुरंत बाद बेहोश हो गई और उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अर्चना किसी मामूली शिकायत के इलाज के लिए देउरा गांव स्थित रविन्द्र गुप्ता के क्लिनिक पहुँची थी। बिना पर्याप्त जांच और बिना किसी विशेषज्ञ की निगरानी के दिया गया इंजेक्शन लगने के कुछ ही क्षणों में वह गिर पड़ी — परिजन दहशत में आ गए और आनन-फानन में 108 एंबुलेंस से उसे नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहाँ डॉ. चन्द्रकुमार ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति को बेहद नाजुक बताया और तुरंत संयुक्त जिला चिकित्सालय, चकिया के लिए रेफर कर दिया।
घटना ने गांववासियों में गहरी बेचैनी और रोष पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि नौगढ़ में दर्जनों झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम क्लिनिक चला रहे हैं — बिना डिग्री, बिना लाइसेंस और बिना मूलभूत आपातकालीन सुविधाओं के। एक ग्रामवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारे यहाँ लोग इलाज के लिए मजबूर हैं, पर अब मौत का डर सताने लगा है।”
स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर तीखा आरोप लगाया है — किसी को पूछने वाला नहीं, जो कल मर गया उसे कौन लौटाएगा?” उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे झोलाछाप डॉक्टर और बढ़ आत्मविश्वास के साथ काम कर रहे हैं।
डॉक्टरी रवैये और इलाज के तरीक़े पर सवाल उठते हुए ग्रामीणों ने मांग की है कि तत्काल क्षेत्रीय सर्वे कराकर अवैध क्लिनिकों की पहचान कर उन्हें बंद कराया जाए। साथ ही, उन लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए जो बिना लाइसेंस के दवा-इंजेक्शन देने के लिए लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बिना आवश्यक जांच और आपातकालीन सेटअप के दिया गया इंजेक्शन एलर्जी, शॉक या संक्रमण का कारण बन सकता है — और ऐसे मामलों में समय पर उचित अस्पताल पहुँच ही जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
इसी बीच, अर्चना के परिजन और ग्रामीण आशा कर रहे हैं कि जिला अस्पताल में उचित इलाज से उसकी जान बच सकती है। परिजनों ने प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनपद स्तर पर न्याय की गुहार लगाएंगे। यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत दर्द नहीं — बल्कि एक चेतावनी है। नौगढ़ के व्यापक इलाक़े में व्याप्त अवैध चिकित्सा प्रथाओं पर रोक न लगने से आने वाले समय में और भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अब वक्त आ गया है कि स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन मिलकर तत्काल, पारदर्शी और कड़े कदम उठाएँ ताकि किसी और अर्चना जैसी मासूम की ज़िंदगी दांव पर न पड़े।

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