
संवाददाता विनोद यादव
शिकायत के बाद जागा वन विभाग, पहले निगरानी पर उठे सवाल
नौगढ़ चन्दौली
चंदौली जनपद के तहसील नौगढ़ क्षेत्र अंतर्गत गहिला दक्षिणी रेंज के कंपार्टमेंट संख्या–18 में वन भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे को लेकर वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए लगभग 25 झोपड़ियों को हटाकर प्लांटेशन को अतिक्रमण मुक्त कराया। यह कार्रवाई सोनभद्र जनपद से आकर वन क्षेत्र में कब्जे का प्रयास कर रहे लोगों के विरुद्ध की गई। हालांकि इस कार्रवाई के साथ-साथ वन विभाग की पूर्व भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जब वन भूमि पर मड़ई, तिरपाल और झोपड़ियां लगाई जा रही थीं तथा पुराने प्लांटेशन के पौधों को नष्ट किया जा रहा था, उस समय संबंधित वन अधिकारी और कर्मचारी आखिर कहां थे? क्या वन भूमि की सुरक्षा और नियमित निगरानी उनका दायित्व नहीं है?
यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या वन विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही सक्रिय होता है। यदि समय रहते निगरानी की जाती, तो अतिक्रमण की नौबत ही क्यों आती? लोगों का कहना है कि यदि शिकायत न की जाती तो संभवतः झोपड़ियां हटाई भी नहीं जातीं और धीरे-धीरे वन भूमि पर स्थायी कब्जा हो जाता।
शिकायत के बाद हरकत में आए वन विभाग ने वन दरोगा राजेंद्र सोनकर के नेतृत्व में टीम गठित कर मौके पर कार्रवाई की। टीम में वन दरोगा प्रशांत कुमार, सावित्री कुमारी सहित अन्य वनकर्मी शामिल रहे। कार्रवाई के दौरान जंगल से भाग रहे चार–पांच व्यक्तियों को पकड़कर पूछताछ की गई, जिन्हें भविष्य में वन क्षेत्र में प्रवेश न करने की चेतावनी देकर छोड़ा गया।
इस संबंध में रेंजर संजय श्रीवास्तव ने कहा कि “वन भूमि पर अतिक्रमण और प्लांटेशन को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध है। भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति होने पर दोषियों के विरुद्ध वन अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी बताया कि अब क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ा दी गई है और सीमावर्ती वन क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
फिलहाल कार्रवाई से वन भूमि को अतिक्रमण से तो मुक्त करा लिया गया है, लेकिन यह घटना वन विभाग की कार्यप्रणाली, सतर्कता और जवाबदेही को लेकर कई अहम सवाल छोड़ गई है, जिनका जवाब मिलना अब भी जरूरी है।




