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Chandauli news योगी के मंत्री सहित चार सांसद–चार विधायक, फिर भी चंदौली को क्या मिला ?

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व्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा

उत्तर प्रदेश का चंदौली जनपद, जिसे धान का कटोरा और ब्लैक राइस उत्पादन के लिए राष्ट्रीय पहचान मिली है, आज विकास के कई मोर्चों पर उपेक्षा का शिकार है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उस इलाके की है, जो कभी एशिया के सबसे बड़े भेड़ प्रजनन केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हुआ करता था—नौगढ़ क्षेत्र का भेड़ा प्रजनन केंद्र। वर्ष 1973 में स्थापित यह विशाल परियोजना लगभग 4700 एकड़ भूमि में फैली हुई थी। रिठिया से लेकर जरगर, बसौली, लालतापुर और भैसौड़ा बांध तक इसका विस्तार था। विशेष बात यह थी कि भैसौड़ा बांध का निर्माण भी इसी परियोजना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया था।

लेकिन आज, यह गौरवशाली केंद्र अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। सरकारी उदासीनता, नीतिगत ठहराव और सबसे बढ़कर,जनप्रतिनिधियों की अनदेखी—ने इसकी स्थिति को अत्यंत दयनीय बना दिया है।

चंदौली से चार सांसद और विधानसभा में चार विधायक चुने जाते हैं। इनमें से एक मंत्री भी है जो प्रदेश सरकार में महत्वपूर्ण पद संभालता है। इसके बावजूद यह सवाल आज भी जनता के बीच गूंजता है कि इतनी बड़ी राजनीतिक उपस्थिति के बाद भी जनपद को आखिर मिला क्या? सत्ता पक्ष हो या विपक्ष—दोनों की चुप्पी यह साबित करती है कि चंदौली के मुद्दे केवल चुनावी भाषणों और मीठी बातों तक सीमित रह गए हैं।

आज हालत यह है कि 4700 एकड़ भूमि में कभी हजारों की संख्या में भेड़ें पाली जाती थीं, वहीं अब सिर्फ 1600 भेड़ और लगभग 200 सूकर ही बच सके हैं। इतने बड़े क्षेत्र में इतने कम पशुओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि परियोजना अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक चुकी है। सुरक्षा और देखरेख की स्थिति तो और भी चिंताजनक है—रात में केवल दो चौकीदार तैनात रहते हैं। इतने विशाल क्षेत्र की निगरानी के लिए यह संख्या मजाक से कम नहीं।

यदि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस परियोजना की क्षमता को समझते और समय रहते ध्यान देते, तो चंदौली की पहचान को नई दिशा और नई ताकत मिल सकती थी। यह परियोजना उनी (ऊन) आधारित उद्योगों, प्रसंस्करण इकाइयों और ऊन उत्पादन से जुड़े हजारों रोजगारों का केंद्र बन सकती थी। नौगढ़ क्षेत्र देश में ऊन उत्पादन के सबसे बड़े हब के रूप में विकसित हो सकता था, और चंदौली एक अलग पहचान के साथ राष्ट्रीय मानचित्र पर खड़ा होता।

चंदौली ब्लैक राइस और धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन लगातार हो रहे भूमि अधिग्रहण ने कृषि योग्य भूमि को कम कर दिया है। ब्लैक राइस जैसे विशेष फसल की खेती इसलिए भी घटती गई क्योंकि समय पर इसकी खरीद न होने से किसान हताश होते रहे। सरकार और जनप्रतिनिधियों से ठोस सहयोग न मिलने के कारण किसान अपनी विशिष्ट फसलें छोड़ने को मजबूर हुए।

आज स्थिति यह है कि जनप्रतिनिधि विकास की ठोस योजनाओं पर ध्यान देने के बजाय केवल मंचों पर भाषण देने और अपना राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने में व्यस्त हैं। जनता हर चुनाव में उम्मीद करती है कि चंदौली की तकदीर बदलेगी, लेकिन वर्षों से मिल रहा है केवल वादों का जाल।

अब समय है कि चंदौली के प्रतिनिधि अपने दायित्व को समझें। नौगढ़ का भेड़ प्रजनन केंद्र सिर्फ एक परियोजना नहीं बल्कि जनपद की संभावनाओं का प्रतीक है। यदि इसे पुनर्जीवित किया जाए तो यह क्षेत्र रोजगार, कृषि, उद्योग और पशुपालन के नए आयाम खोल सकता है।

चंदौली तब ही आगे बढ़ेगा, जब जनप्रतिनिधि भाषण नहीं,कर्म और दृष्टि से काम करेंगे।


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