
ब्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
चंदौली जनपद नियामताबाद ब्लाक के अमोघपुर गांव में जल निकासी की गंभीर समस्या इन दिनों ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन चुकी है। गांव की गलियों और सड़कों पर भरा बदबूदार पानी ग्रामीणों के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले यह समस्या नहीं थी। वर्षों पहले क्षेत्र के पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र नाथ पांडे के प्रयासों से एक करोड़ पच्चीस लाख की लागत से एक पक्की नाली का निर्माण कराया गया था, जिससे जल निकासी आसानी से हो जाती थी।
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पड़ाव से नेशनल हाईवे NH-2 को जोड़ने वाली सड़क के निर्माण कार्य के दौरान पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार ने उस नाली को ही तोड़ दिया। इसके बाद न तो नई नाली बनाई गई, और न ही किसी ने पुराने निकासी मार्ग को दुरुस्त करने की कोशिश की। नतीजतन, गांव में पानी भरने लगा है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो चुकी है। गलियों में गंदा, बदबूदार पानी जमा हो गया है और ग्रामीण इसी पानी में चलने को मजबूर हैं।

समस्या जब मीडिया की सुर्खियों में आई, तो भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय विधायक रमेश जायसवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को मौके पर बुलाया और सख्त फटकार लगाई। विधायक ने कहा कि समस्या का समाधान तत्काल किया जाए और जेसीबी लगाकर काम तुरंत शुरू किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश तो दे दिए, साथ ही सोशल मीडिया पर उनकी मौके की तस्वीरें और वीडियो भी वायरल हो गईं। लोग विधायक की सक्रियता की तारीफ करने लगे।

लेकिन ये सक्रियता सिर्फ कैमरे तक ही सीमित रह गई। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक के जाने के बाद, सूट-बूट में पहुंचे कुछ कर्मचारी और अधिकारी थोड़ी देर रुकने के बाद मौके से चुपचाप खिसक गए। न जेसीबी आई, न फावड़ा चला, और न ही कोई सफाई या निर्माण कार्य शुरू हुआ। गांव की हालत जैसी की तैसी बनी हुई है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब केवल दिखावे की कार्रवाई कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक विधायक खुद मौके पर रहते हैं, अधिकारी हरकत में दिखते हैं, लेकिन जैसे ही वे रवाना होते हैं, सबकुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है। अमोघपुर के लोग अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या उनकी समस्या का समाधान सिर्फ सोशल मीडिया की पोस्ट और कैमरे के सामने की बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा?
अमोघपुर के ग्रामीण अब वास्तविक समाधान की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि केवल भाषण नहीं, बल्कि धरातल पर काम दिखे। जब तक जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं होती, गांव का जीवन नारकीय बना रहेगा और यह सरकारी व्यवस्था की विफलता का एक और उदाहरण बन जाएगा।




