
ब्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
चंदौली, 16 अगस्त 2025:
देश की आज़ादी और अखंडता की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों का सम्मान करना हर देशवासी, विशेष रूप से जनप्रतिनिधियों का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। लेकिन आज के राजनीतिक परिदृश्य में यह कर्तव्य भी विवाद और दलगत राजनीति की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।

16 अगस्त को चंदौली जनपद में सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक सुशील सिंह और सपा सांसद विरेंद्र सिंह के बीच शहीदों के सम्मान को लेकर जुबानी जंग देखने को मिली। भाजपा विधायक सुशील सिंह ने तीखा बयान देते हुए कहा कि “जो लोग दिन-रात PDA–PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) की बात करते हैं, वो शहीदों के सम्मान पर मौन क्यों हो जाते हैं
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “जब मैंने सैयदराजा विधानसभा क्षेत्र में शहीद अंगनु बिंद की प्रतिमा का अनावरण किया, तब सांसद महोदय की ओर से कोई शब्द तक नहीं आया। क्या अंगनु बिंद PDA की श्रेणी में नहीं आते? क्या अब शहीदों का सम्मान भी जाति और वर्ग के चश्मे से देखा जाएगा
सुशील सिंह ने आरोप लगाया कि विरोधियों द्वारा शहीदों का मुद्दा राजनीतिक चश्मे से देखने की प्रवृत्ति ने न सिर्फ लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर भी चोट की है। उन्होंने कहा, “विपक्ष में रहकर सरकार की नीतियों का विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन जब शहीदों की बात आए, तो उसमें राजनीति करना अत्यंत शर्मनाक है
विधायक ने तीखे लहजे में कहा कि जो खुद को संविधान का रक्षक बताते हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए
“क्या शहीदों का सम्मान करना संविधान विरोधी है
क्या शहीदों की प्रतिमा का अनावरण आपकी विचारधारा को ठेस पहुंचाता है?
या फिर इससे आपकी राजनीति कमजोर पड़ती है
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि वाकई सांसद PDA की आवाज बनना चाहते हैं, तो अपने क्षेत्र के बाकी शहीदों की सूची तैयार करिए, उनकी प्रतिमाएं बनवाइए, और सार्वजनिक रूप से उन्हें सम्मान दीजिए। कौन रोकता है? लेकिन अफसोस कि बातों में तो PDA की चिंता दिखती है, मगर काम के नाम पर सिर्फ बयानबाज़ी है।
विधायक ने कहा, “जनता अब सब जानती है। जो अपने क्षेत्र के वीरों का सम्मान नहीं कर सकते, वे जनता के अधिकार और बुनियादी जरूरतों की रक्षा कैसे करेंगे? केवल सत्ता पाने के लिए किसी को विरोधी और किसी को गुरु बना लेना, यह राजनीति नहीं, अवसरवाद है।”
उन्होंने अंत में कहा कि
“भारत शहीदों की धरती है, यहां महापुरुषों और बलिदानियों का गौरवशाली इतिहास रहा है।
उनका विरोध करना नहीं, सम्मान करना राष्ट्रनीति का आधार होना चाहिए।
राजनीति छोड़ो, शहीदों का सम्मान कीजिए।
वरना इतिहास गवाह है –
जो वीरों का अपमान करते हैं, वो नाम नहीं, धूल बन जाते हैं।”




