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Chandauli news,पिता पुत्र की एक साथ निकली अर्थी हर आंख हुई नम रुह कांप गया,गरीबों की जिंदगी आज भी कितनी असुरक्षित है, क्या पता कि आज सावन का आखिरी रात है

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व्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा

यह दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के चंदौली जनपद के बबुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत शुक्रवार गांव की है, जहाँ एक कच्चे मकान की दीवार गिरने से पिता और पुत्र की एक साथ मौत हो गई। इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया है। हर आंख नम है और दिल दहल गया है। गांव में मातम का माहौल है, कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहा।

मृतक पिता पुत्र

हादसा देर रात करीब 11:50 बजे का है। सावन का महीना चल रहा था, मौसम में नमी थी और रिमझिम बारिश हो रही थी। शिवमूरत अपने लगभग 35 वर्षीय पुत्र जय हिंद के साथ अपने कच्चे मकान में सोए हुए थे। दोनों एक ही चारपाई पर लेटे थे, जैसे एक मां अपने छोटे बच्चों को सुलाती है। पिता की गोद में सोए पुत्र को शायद यह एहसास भी नहीं था कि यह रात उसकी जिंदगी की आखिरी रात होगी।

शिवमूरत का मकान काफी पुराना था, जिसकी दीवारें वर्षों से मरम्मत के अभाव में कमजोर हो चुकी थीं। अचानक रात को दीवार भरभरा कर गिर पड़ी और दोनों बाप-बेटे उसके मलबे के नीचे दब गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़े और मदद के लिए चिल्लाने लगे। मलबा हटाने की कोशिश की गई, लेकिन गीली मिट्टी और अंधेरे के कारण राहत कार्य में बाधा आई।

ग्रामीणों ने मिट्टी हटाकर उन्हें बाहर निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जब तक लोगों ने मलबा हटाया, तब तक शिवमूरत और उनके पुत्र की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। यह दृश्य इतना भयावह था कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखों से आंसू निकल पड़े।

सूचना मिलते ही बबुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। गांव में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार प्रशासन को इस पुराने जर्जर मकान की स्थिति के बारे में बताया था, लेकिन कोई भी अधिकारी समय रहते नहीं पहुंचा। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने रात में ही अधिकारियों को फोन किया था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी करीब 8 घंटे की देरी से पहुंचे।

इस दर्दनाक हादसे ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि गरीबों की ज़िंदगी आज भी कितनी असुरक्षित है। एक बाप अपने बच्चे को लेकर चैन की नींद सोने गया था, उसे क्या पता था कि यह नींद अब कभी नहीं खुलेगी। प्रशासन की लापरवाही और जर्जर मकानों की अनदेखी ने एक मासूम की जान ले ली और एक बाप की ममता भरी छांव को सदा के लिए खत्म कर दिया।

यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सबक है कि समय रहते पुराने मकानों की मरम्मत कराना कितना जरूरी है। प्रशासन को भी चाहिए कि ऐसे जर्जर मकानों की पहचान कर समय रहते उचित कदम उठाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

पिता पुत्र की एक साथ निकली अर्थी

अंत में, पिता-पुत्र की एक ही गांव से जब दो अर्थी घर से निकली तो हर आंख नम थी और पूरा गांव स्तब्ध। यह मंजर देखकर किसी का भी दिल कांप उठे।

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