
व्यूरो रिपोर्ट रविशंकर मिश्रा
मुगलसराय तहसील अंतर्गत बीते दिनों लगातार हुई तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। चंद्रप्रभा नदी सहित अन्य नदियों के उफान पर आने से तहसील के करीब आधा दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। अचानक बढ़े पानी ने लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने पर मजबूर कर दिया। एक सप्ताह तक ऊंचे स्थानों पर गुज़र-बसर करने के बाद जब पानी घटा, तब लोगों के सामने टूटी-फूटी ज़िंदगी पड़ी थी। लगभग 70 से अधिक मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे। जिनके कच्चे घर गिर गए, वे बांस, बल्लियों और प्लास्टिक की चादरों के सहारे अपना जीवन फिर से खड़ा करने पर मजबूर हैं।

आपदा के दौरान चंदौली के जिला अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार और दर्जनों लेखपालों की टीम ने गांवों का निरीक्षण कर एक बड़ी सूची तैयार की थी, ताकि पात्र लोगों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सके। जब यह सूची बन रही थी, तब गरीब परिवारों को उम्मीद जगी थी कि अब शायद उन्हें भी पक्के मकान का सहारा मिलेगा। परंतु बाढ़ का पानी उतरते ही जैसे अधिकारियों की सक्रियता भी कम होती चली गई।

इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है और कई परिवार छोटे-छोटे बच्चों के साथ प्लास्टिक की झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। गरीबी कैसी होती है, यह वही समझ सकता है जो इसे रोज़ महसूस करता है। सरकारें दावे तो बहुत करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत क्या है, यह जानना हो तो इन गांवों का हाल देखना चाहिए। यहां रहने वाले लोग ठंड, हवा और बरसात जैसी हर चुनौती से अपने दम पर जूझते दिखते हैं।
समाचार टाइम्स की टीम ने पचोखर, बुधवार पांडेयपुर, हसनपुर, कम्हरिया, गोपालपुर तकीया, चदाईत, शिवनाथपुर, घुरहुपुर और उसरौडी गांव का निरीक्षण किया। टीम को 11 ऐसे परिवार मिले, जो आज भी खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक, त्रिपाल और बांस-बल्लियों के सहारे जीवन गुजार रहे हैं। लोगों ने बताया कि अधिकारी नाम और गांव नोट कर गए थे और कहा था कि जल्द ही आवास मिलेगा, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा।
इस मामले पर एसडीएम मुगलसराय अनुपम मिश्रा ने कहा कि आवास आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है और पात्र परिवारों को जल्द ही मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ मिलेगा।
लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि अभी भी कई परिवार ठंड की मार झेल रहे हैं। सवाल यह है कि जब तक लाभ मिलेगा, तब तक इन गरीबों की ठंड कैसे कटेगी और क्या कोई उनका दर्द समझने आएगा?




