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Chandauli news,जाती आधारित राजनीति और माफियाओं से मिलीभगत,आदिवासियों के घर गिराए जा रहे, बड़े कब्जेदारों को खुली छूट”

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संवाददाता विनोद यादव

नौगढ़ (चंदौली)। तहसील मुख्यालय पर भाकपा (माले) कार्यकर्ताओं द्वारा शुरू की गई 48 घंटे की भूख हड़ताल सोमवार को और तीखी हो गई, जब नेताओं ने वन विभाग पर गंभीर आरोपों की बौछार कर दी। नेताओं ने कहा कि वन विभाग कानून की रक्षा नहीं, बल्कि जाती विशेष की राजनीति कर रहा है। आदिवासी–वनवासी परिवारों के घर तोड़े जा रहे हैं, लेकिन बड़े वन–भू माफियाओं के पक्के निर्माणों को विभाग खुली छूट दे रखा है। भाकपा (माले) राज्य स्थाई समिति सदस्य कामरेड रामप्यारे राम ने आरोप लगाया कि बड़े–बड़े कब्जेदार सालों से जंगल की जमीन पर आलीशान भवन, चहारदीवारी और पक्के निर्माण करवा रहे हैं, लेकिन वन विभाग उन पर एक भी कार्रवाई नहीं करता। “जिनके पास राजनीतिक और आर्थिक ताकत है, उन्हें वन विभाग ने सुरक्षा कवच दे रखा है, जबकि गरीब आदिवासी–वनवासी परिवारों को बेदखली का नोटिस देकर उनके घरों को तोड़ा जा रहा है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभाग के कुछ अधिकारी जाती देखकर कार्रवाई कर रहे हैं। “वन विभाग का मनमाना और पक्षपातपूर्ण रवैया अब खुलकर सामने है। जिन गरीबों के पास कागज़ात हैं, उनकी भी घर–झोपड़ियां तोड़ी जा रही हैं, जबकि माफियाओं के स्थायी निर्माण को देख भी अनदेखा कर दिया जाता है,” उन्होंने कहा। जाती के आधार पर नापी–जोख में धांधली का आरोप नेताओं ने खुलासा किया कि विभागीय कार्रवाई का आधार बनने वाली जमीन की नापी भी गलत तरीके से कराई जा रही है। सरकारी सर्वेयर की जगह दैनिक वेतनमान कर्मचारी से नापी कराई जा रही है, जो अपने जाती–समुदाय और रिश्तेदारों को खुली छूट दे देता है। “ऐसी फर्जी नापी न सिर्फ अवैध है, बल्कि गरीबों और आदिवासियों के साथ खुला अन्याय है,” जिला सचिव अनिल पासवान ने कहा। राजनीतिक कार्यकर्ताओं को निशाना, माफियाओं को संरक्षण भाकपा (माले) नेताओं ने कहा कि जो भी राजनीतिक कार्यकर्ता बड़े माफियाओं द्वारा जंगल पर किए जा रहे कब्जे का विरोध करता है, उसे वन विभाग, पुलिस और भू–माफियाओं के गठजोड़ द्वारा फर्जी मुकदमों में फँसाकर जेल भेजने की कोशिश की जाती है।

गोंड आदिवासियों को जाति प्रमाण पत्र न देने की साजिश संगठन के नेताओं ने कहा कि नौगढ़ क्षेत्र के गोंड आदिवासियों को आज भी अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनका हक़ और अधिकार छीना जा रहा है। वहीं जनकपुर गांव में दलित गरीबों को पट्टे की जमीन पर कब्जा दिलाने के बजाय उन्हीं पर मुकदमे लादे जा रहे हैं।
“संघर्ष तेज करेंगे” एपवा जिलाध्यक्ष मुन्नी गोंड ने कहा कि अब समय आ गया है कि वन विभाग की मनमानी और जाती आधारित राजनीति के खिलाफ संगठित संघर्ष किया जाए।
सभा को कामरेड पतालू गोंड, संगीता देवी, लालमणि देवी, ईश्वर दयाल सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। अध्यक्षता रामेश्वर प्रसाद ने की और संचालन कामरेड सुरेश कोल ने किया।
नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि विभाग ने पक्षपातपूर्ण रवैया नहीं रोका और मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को जिले–भर में और अधिक तेज किया जाएगा।

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