
ग्राम प्रधान के उकसावे पर 15–20 लोगों का उत्पात, मारपीट का प्रयास
गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज, पहले से भी विवादों में रहा है मामला
विनोद यादव संवाददाता
नौगढ़ (चंदौली):
जयमोहनी रेंज के हरियाबांध बीट अंतर्गत भैसोड़़ा कंपार्टमेंट संख्या-18 स्थित आरक्षित वन क्षेत्र में मंगलवार (14 अप्रैल 2026) की देर रात उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब अवैध बोरिंग की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम को ग्रामीणों के एक समूह ने घेर लिया और उनके साथ अभद्रता करते हुए सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न की। घटना के दौरान मारपीट का भी प्रयास किया गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
वन विभाग को मुखबिर के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई थी कि आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से बोरिंग कराई जा रही है। सूचना मिलते ही विभागीय टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई। टीम जैसे ही बोरिंग स्थल के पास पहुंची, उससे पहले ही ग्राम मैरहंवा निवासी प्रधान अनिरुद्ध यादव अपने लगभग 15–20 समर्थकों के साथ वहां मौजूद मिला।

आरोप है कि प्रधान के उकसावे पर उसके साथियों ने अचानक आक्रामक रुख अपनाते हुए वन विभाग की टीम को चारों ओर से घेर लिया। इस दौरान गाली-गलौज करते हुए कर्मचारियों को डराने-धमकाने की कोशिश की गई और जांच कार्य में बाधा डाली गई। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब कुछ लोगों ने कर्मचारियों को वाहन से बाहर खींचने और मारपीट करने का प्रयास किया।
वन विभाग के कर्मचारियों ने किसी तरह संयम बनाए रखा और तत्काल रेंजर जयमोहनी को घटना की जानकारी दी। वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव द्वारा पुलिस को सूचित किए जाने पर मौके पर पुलिस पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति सामान्य हो सकी, अन्यथा बड़ा विवाद खड़ा हो सकता था।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
घटना की गंभीरता को देखते हुए थाना चकरघट्टा, नौगढ़ में ग्राम प्रधान अनिरुद्ध यादव एवं अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 127, 132, 189(2) एवं 221 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
पहले से भी दर्ज है मुकदमा, बढ़ सकती है सख्ती – वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि संबंधित ग्राम प्रधान के खिलाफ पूर्व में भी वन अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। ऐसे में इस बार की घटना को गंभीरता से लेते हुए कठोर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
वीडियो साक्ष्य खंगाले जा रहे, कई और पर गिरेगी गाज – वन क्षेत्राधिकारी अमित श्रीवास्तव ने बताया कि घटना से संबंधित वीडियो क्लिप एवं अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
ग्रामीणों के सवालों ने बढ़ाई बहस
घटना के बाद क्षेत्र में एक नई बहस भी छिड़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आरक्षित वन क्षेत्र में झोपड़ी और मकान बनाए जा रहे थे, तब वन विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।
ग्रामीणों के अनुसार, अब जब लोग वहां बसकर वर्षों से गुजर-बसर कर रहे हैं, तो पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता स्वाभाविक है। ऐसे में यदि पानी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, तो उसके समाधान पर भी विचार किया जाना चाहिए। लोगों का यह भी कहना है कि यदि पहले ही सख्ती बरती जाती, तो आज ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
थानाध्यक्ष चकरघट्टा ने बताया कि घटना के संबंध में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी नामजद एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों को गिरफ्तार कर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग की सख्त चेतावनी
वन विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आरक्षित वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, वन संपदा का दोहन तथा शासकीय कार्य में बाधा को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों के साथ अभद्रता करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।
वन क्षेत्राधिकारी का कहना है कि यदि किसी को अपनी बात रखनी है, तो वह नियम और मर्यादा के भीतर ही रखे, अन्यथा कानून अपना काम करेगा।
तनावपूर्ण माहौल, प्रशासन पूरी तरह सतर्क – घटना के बाद पूरे क्षेत्र में माहौल गरमा गया है। एक ओर प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है, तो दूसरी ओर ग्रामीण अपनी मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




